मध्यप्रदेश में सत्ता संघर्ष की लड़ाई, पंजा थामेगा कमल को या कमल आएगा पंजे की जकड़ में


(सूरज जायसवाल)
 मध्यप्रदेश में सत्ता संघर्ष की लड़ाई जोरों से जारी है। कभी कांग्रेस के विधायक भाजपा के होटल में जा बैठते हैं तो कांग्रेस भी भाजपा के विधायकों को तोड़ने में लगी है। भाजपा का मध्यप्रदेश में यह दूसरी बार सत्ता प्राप्ति का प्रयास विफल होता नजर आ रहा है और इस प्रयास की जानकारी कांग्रेस को भाजपा के ही सूत्रों ने प्रदान की थी। मध्य प्रदेश की सरकार को किसी प्रकार का खतरा न हो पाए और अपनी पुरानी गलतियों से सबक सीखते हुए कांग्रेस मध्यप्रदेश में न सिर्फ अपने विधायकों की गतिविधियों पर बल्कि भाजपा के विधायकों के ऊपर भी पूरी नजर  दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह  के माध्यम से रख रही है। दिग्विजय सिंह वर्तमान में कमलनाथ सरकार के संकट मोचन के रूप में हमेशा सामने खड़े नजर आते हैं। दरअसल यह लड़ाई  सत्ता से ज्यादा आगामी दिनों में होने जा रहे राज्यसभा सदस्य के चुनाव पर टिकी है। मध्यप्रदेश से तीन राज्यसभा सदस्य चुने जाने हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों का एक-एक सदस्य चुना जाना तय है और तीसरे सदस्य पर भी अंक गणित के अनुसार कांग्रेस का दावा मजबूत है। लेकिन भाजपा   किसी भी तरह तीसरे सदस्य के रूप में अपना प्रत्याशी जिताना चाहती है। क्योंकि आगामी दिनों में राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों की संख्या कम होने वाली है, जो कि केंद्र सरकार की लिए कठिन राह साबित हो सकती है। मध्यप्रदेश की सियासत में कांग्रेस के अंदर चल रहे भूचाल का भाजपा फायदा उठाना चाहती है। लेकिन भाजपा को सबसे बड़ी दिक्कत मध्यप्रदेश में कमल - दिग्गी की जोड़ी से है। यही कारण है कि भाजपा अपने प्रयास में चाह कर भी असफल हो जाती है। कांग्रेस के असंतुष्ट विधायक दबाव की राजनीति की नीति पर काम कर रहे हैं, जिसे मुख्यमंत्री कमलनाथ अच्छी तरह समझते हैं। वहीं भाजपा के अंदर आया राम, गया राम रूपी विधायक अपने आप को अपमानित और असहज महसूस कर रहे हैं। लेकिन सत्ता में बने रहने सत्ता से बेदखल करने की इस मध्यप्रदेश की लड़ाई में सबसे ज्यादा नुकसान प्रदेश की जनता का हो रहा है और सबसे ज्यादा फायदे में प्रदेश के नौकरशाह हैं। 15 साल तक भाजपा के राज में मलाई खाने वाले नौकरशाह इस बात पर खुश हो रहे हैं कि फिर से उनका पुराना भ्रष्टाचार का राज वापस आ सकता है। बमुश्किल मुख्यमंत्री कमलनाथ किसी हद तक नौकरशाही के इस बेलगाम घोड़े को अपने काबू में करने का प्रयास कर रहे हैं। आगामी दिनों में प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां और अधिक गरमा  आएंगी लेकिन कमल - दिग्गी की इस जोड़ी को अब कांग्रेस आलाकमान भी प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए अनदेखा करने का साहस नहीं कर पायेगा!
 (सूरज जायसवाल राजनीतिक विश्लेषक)


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